गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (जीबीपीआईईटी), घुड़दौड़ी में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रज्ञा प्रवाह, विज्ञान भारती, जेनेसिस सोसाइटी ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, IEEE स्टूडेंट्स चैप्टर एवं उत्तराखंड वन विभाग के साथ मिलकर विभिन्न पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की वैश्विक थीम “Ending Plastic Pollution” (प्लास्टिक प्रदूषण का अंत) रही, जिसके अनुरूप कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रातः 10:00 बजे संस्थान के प्रशासनिक भवन (Administrative Block) से संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) वी. के. बंगा द्वारा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कर किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए वृक्षारोपण में सहभागिता की। उत्तराखंड वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए लगभग 30 पौधों का रोपण संस्थान परिसर में किया गया। सभी प्रतिभागियों ने पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का भी संकल्प लिया। वृक्षारोपण कार्यक्रम के उपरांत जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सेमिनार हॉल में मुख्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सरस्वती वंदना की प्रस्तुति छात्राओं अक्षिता, प्राची एवं आश्रिया द्वारा दी गई। इस अवसर पर जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण भट्ट ने स्वागत भाषण देते हुए पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की निरंतर जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। अपने संबोधन में संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) वी. के. बंगा ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय चुनौतियाँ पूरी मानवता के समक्ष गंभीर विषय हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी संस्थानों की भूमिका केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सतत विकास के मूल्यों का विकास करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को प्रकृति एवं मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सार्थक प्रयास बताते हुए सभी से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। छात्र गौरव कृषाली द्वारा पर्यावरण विषयक कविता प्रस्तुत की गई, जबकि छात्रा आस्था श्रीवास्तव ने पर्यावरण संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए। इसके अतिरिक्त शुभम पुरोहित एवं तनिष द्वारा प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा वृक्षारोपण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत एवं सामूहिक स्तर पर प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर डॉ. ममता बौंठियाल (डीन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट), डॉ. पवन अग्रवाल, डॉ. सुरेश फुलारा, श्री प्रांशु डंगवाल, डॉ. काजल गौतम सहित संस्थान के शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. ममता बौंठियाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी सहयोगी संस्थाओं, अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर माननीय तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं जीबीपीआईईटी प्रशासनिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. धन सिंह रावत ने अपने संदेश में विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को जन-आंदोलन बनाने तथा प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। वृक्षारोपण अभियान की सफलता में वन विभाग का विशेष योगदान रहा। मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल रेंज डॉ. धीरज पांडेय, सहायक वन संरक्षक, पौड़ी गढ़वाल डॉ. आयशा बिष्ट तथा सहायक वन संरक्षक, रुद्रप्रयाग डॉ. दिवाकर पंत द्वारा वृक्ष पौध उपलब्ध कराई गईं, जिससे कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिला। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ तथा प्रतिभागियों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराने में सफल रहा।

