October 11, 2026
पहाड़ों में कीवी की खेती और जंगली जानवरों से मुक्ति विषय पर रेडियो वार्ता

पहाड़ों में कीवी की खेती और जंगली जानवरों से मुक्ति विषय पर रेडियो वार्ता

वर्तमान में उत्तराखंड की मूलभूत समस्या जंगली जानवरों द्वारा फसलों को अधिक मात्रा में नुकसान पहुंचाया जाना है लगभग 50 से 60% फसलों को जंगली जानवरों द्वारा नष्ट कर दिया जाता है इसलिए पहाड़ों के युवाओं और किसानों का रुझान दिन प्रतिदिन खेती के प्रति घटता जा रहा है तथा आमदनी ना होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन बढ़ता जा रहा है ऐसे में उत्तराखंड में कीवी की खेती पर्वतीय किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है क्योंकि कीवी की फसल को किसी भी प्रकार के जंगली जानवरों द्वारा नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है उपरोक्त के सापेक्ष राज्य सरकार भी किसानों के हित में कीवी मिशन के अंतर्गत कीवी के बगीचे लगाने हेतु 80% अनुदान दिया जा रहा है तथा कीवी मिशन के प्रचार एवं प्रसार एवं तकनीकी जानकारी को किसानों तक पहुंचाने में जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर अंशुमान सिंह से आकाशवाणी के अधिकारी श्री अशोक कुमार ने ऑल इंडिया रेडियो पौड़ी में रेडियो वार्ता की, जिसका विषय था,
उत्तराखंड में कीवी की खेती और जंगली जानवरों से मुक्ति उपरोक्त वार्ता में डॉक्टर अंशुमान सिंह किसानों को कीवी उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी, डॉ अंशुमान सिंह ने बताया कि हमारे देश का 50%कीवी का उत्पादन पूर्वोत्तर राज्यों में होता है यदि हम उत्तराखंड की बात करें तो 7 से 8% कीवी का उत्पादन उत्तराखंड में किया जा रहा है उत्तराखंड में लगभग 560 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर कीवी का उत्पादन किया जा रहा है जिसको बढ़ाकर राज्य सरकार ने 3500 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर कीवी उत्पादन करने रखने का लक्ष्य रखा है तथा इसमें 17500 किसानों को जोड़ने का भी लक्ष्य रखा है वर्तमान में पौड़ी जनपद में 50 से 60 हेक्टेयर भूमि पर कीवी की खेती की जाती है जिससे लगभग 300 से 400 कुंटल का उत्पादन किया जा रहा है डॉ अंशुमान सिंह ने रेडियो वार्ता में किसानों को बताया कि कीवी की खेती क्यों कहां और कैसे करनी है साथ ही उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम हम अक्टूबर माह में लेआउट बनाएं नवंबर में गड्ढों की खुदाई करें दिसंबर में गढ़ों की भराई करें और जनवरी माह में पौधों का रोपण करें उन्होंने रोपण की जाने वाली प्रजातियों के बारे में भी बताया और नर और मादा पौधे के अनुपात के बारे में बताया ट्रेनिंग और प्रूनिंग के बारे में भी बताया , टी बार सिस्टम,एवं पोलिनेशन के बारे में भी जानकारी दी तथा तुड़ाई,ग्रेडिंग पैकेजिंग एवं मार्केटिंग के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

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