उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की चुनौतियाँ किसी से छिपी नहीं हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर लगातार पूरी लगन और मेहनत से मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण पौड़ी जिला अस्पताल में देखने को मिला। पौड़ी जनपद के थलीसैंण निवासी रणवीर सिंह रावत (40 वर्ष), जो पेशे से होटल में कुक हैं, पिछले ढाई साल से पैरों के लगातार दर्द से परेशान थे। दरअसल कुछ समय पहले घोड़े की लात लगने से उनके पैर की हड्डी मुड़ गई थी। प्लास्टर लगे होने के बावजूद वे चलने लगे, जिससे हड्डी गलत तरीके से जुड़ गई और उनका एक पैर छोटा-बड़ा हो गया। हालत ऐसी हो गई कि उन्हें चलने-फिरने में भारी दिक्कत और हमेशा दर्द बना रहता था। जब वे जिला अस्पताल पौड़ी पहुंचे जहां ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अगम कांत और उनकी टीम ने जांच के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया। डॉक्टरों के अनुसार गलत तरीके से जुड़ी हड्डी बाहर की ओर निकल आई थी, जिससे मरीज को चलने में गंभीर परेशानी हो रही थी। करीब 4 घंटे 30 मिनट तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक हड्डी को सीधा कर दिया। अब मरीज का पैर सामान्य स्थिति में है और वह चलने योग्य हो गया है। मरीज रणवीर सिंह रावत ने खुशी जताते हुए कहा कि अब उनका पैर पूरी तरह ठीक है और दर्द से राहत मिल गई है। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया। वहीं डॉ. अगम कांत ने लोगों से अपील की कि चोट लगने या हड्डी संबंधी समस्या होने पर लापरवाही न करें और समय रहते चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें, ताकि भविष्य में गंभीर दिक्कतों से बचा जा सके। यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि पहाड़ों के सरकारी अस्पतालों में भी समर्पित डॉक्टरों की मेहनत से बेहतर उपचार संभव है।

