पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय प्रेस दिवस धूमधाम से मनाया गया, लेकिन बदलती पत्रकारिता और अनुभवहीन व अशिक्षित लोगों के मीडिया में बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर गंभीर चिंताएँ भी सामने आईं। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मानी जाने वाली पत्रकारिता की विश्वसनीयता लगातार घट रही है। इसका प्रमुख कारण है पत्रकारिता के लिए स्पष्ट योग्यता, नियम और कानूनों का अभाव। आज कोई भी बिना डिग्री या प्रशिक्षण के सिर्फ मोबाइल और माइक लेकर खुद को पत्रकार बताने लगा है। इससे वर्षों से शिक्षा लेकर इस क्षेत्र में ईमानदारी से काम कर रहे पत्रकार खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। पौड़ी में आयोजित प्रेस दिवस कार्यक्रम के बाद युवा पत्रकारों ने बताया कि जिले में कई लोग केवल सोशल मीडिया और फेसबुक तक सीमित रहते हुए भी स्वयं को वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं। कई लोग नाम मात्र के अखबारों से मान्यता लेकर सक्रिय पत्रकारों की जगह घेर रहे हैं। सरकारी प्रेस नोट पर निर्भर ऐसे लोग पत्रकार नहीं बल्कि “कॉपी-पेस्ट मशीन” बनकर रह गए हैं। युवा पत्रकारों का कहना है कि जो लोग इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट मीडिया में ईमानदारी, सक्रियता और जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं, उन्हें प्रशासन की ओर से प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत रखने और मीडिया की विश्वसनीयता बचाने के लिए कठोर नियम-कानून बनाना समय की जरूरत है, ताकि सोशल मीडिया आधारित तथाकथित पत्रकारों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

