पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के जिवई गांव में बीते सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। गांव की 40 वर्षीय लक्ष्मी देवी, पत्नी महिपाल सिंह, पर झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक हमला कर दिया। घटना तब हुई जब लक्ष्मी देवी तीन–चार अन्य महिलाओं के साथ रोज़ की तरह गांव के निकट घास काटने गई थीं। जानकारी के अनुसार महिलाएं घास काटने में व्यस्त थीं, तभी झाड़ियों में छिपा भालू तेजी से निकला और लक्ष्मी देवी पर टूट पड़ा। भालू ने उन पर कई बार हमला किया, जिसमें उनकी दाईं आंख और सिर पर गंभीर चोटें आईं। हमले की भयावहता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि घायल महिला कुछ समय तक उठ भी नहीं पा रही थीं। हमला होते ही साथ की महिलाओं ने जोर-जोर से चीखकर मदद के लिए पुकारा। शोर सुनकर भालू कुछ दूरी तक झिझका और फिर जंगल की ओर भाग गया। तत्पश्चात ग्रामीणों ने मौके पर पहुँचकर घायल लक्ष्मी देवी को संभाला और तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल पहुंचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। चिकित्सा प्रभारी डॉ. शैलेन्द्र रावत ने जानकारी दी कि महिला की दाईं आंख के आसपास गहरे घाव हैं और सिर में भी गंभीर चोटें आई हैं। बेहतर उपचार के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र रावत ने मामले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर 50 हजार रुपये मुआवजा राशि पीड़ित महिला को भेज दी गई है। शेष मुआवजा उनकी चिकित्सीय रिपोर्ट और स्थिति के मूल्यांकन के बाद जारी किया जाएगा।इस घटना के बाद जिवई समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भय व रोष दोनों व्याप्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ समय से भालू और गुलदार की आवाजाही लगातार बढ़ रही है लेकिन वन विभाग और सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार के लिए आम आदमी के जीवन की कोई कीमत नहीं रह गई है। लगातार हो रहे वन्यजीव हमलों ने लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल कर दिया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए, पिंजरे लगाए जाएं तथा मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

