March 7, 2026
भाजपा ने दीप्ती रावत भारद्वाज को बनाया प्रदेश महामंत्री

भाजपा ने दीप्ती रावत भारद्वाज को बनाया प्रदेश महामंत्री

महिला सशक्तिकरण और संगठनात्मक रणनीति पर फोकस, 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी का संकेत

पौड़ी: उत्तराखंड भाजपा ने अपने नए प्रदेश पदाधिकारियों की 42 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। 14 सितंबर 2025 को घोषित इस सूची में पौड़ी गढ़वाल से आने वाली दीप्ती रावत भारद्वाज को प्रदेश महामंत्री का दायित्व सौंपा गया है। यह पहली बार है जब भाजपा ने उत्तराखंड में किसी महिला को प्रदेश महामंत्री बनाया है, जिसे पार्टी के भीतर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मीडिया और छात्र राजनीति से लेकर भाजपा संगठन तक

दीप्ती रावत भारद्वाज मीडिया जगत से जुड़ी रही हैं। उन्होंने IBN-7 और TV-18 में काम करते हुए महिला अधिकार और सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाई। उससे पहले वे दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय रहीं और महा सचिव भी रहीं। भाजपा संगठन में वे पहले भी जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं, लेकिन इस बार महामंत्री जैसा अहम पद मिलना उनके राजनीतिक करियर के लिए मील का पत्थर है।

महिला नेतृत्व पर भाजपा का दांव

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा ने यह नियुक्ति 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर की है। हालिया सर्वेक्षणों में देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित माना जाना और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों के बाद पार्टी पर महिला हितैषी छवि को मजबूत करने का दबाव था। ऐसे में दीप्ती रावत का आगे आना पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

बड़ी जिम्मेदारी, अहम भूमिका

महामंत्री पद संगठन में अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस जिम्मेदारी के तहत दीप्ती रावत को आंतरिक व्यवस्था संभालने, चुनावी तैयारियों को धार देने और विभिन्न मोर्चों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी निभानी होगी। उनकी नियुक्ति को भाजपा द्वारा महिला मतदाताओं को साधने और संगठन में नई ऊर्जा लाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

संदेश और भविष्य की चुनौती

दीप्ती रावत का महामंत्री बनना न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भाजपा के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि पार्टी लैंगिक समानता और महिला नेतृत्व को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है। हालांकि संगठन के भीतर उन्हें “दिल्ली और देहरादून केंद्रित राजनीति करने वाली” भी कहा जाता रहा है। ऐसे में देखना होगा कि वे राज्यभर में किस तरह अपनी स्वीकार्यता और प्रभाव बढ़ाती हैं।

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