March 7, 2026
IAS आशीष चौहान ने विदाई के क्षणों में लिखा गढ़वाली संदेश

IAS आशीष चौहान ने विदाई के क्षणों में लिखा गढ़वाली संदेश

डॉ. आशीष चौहान, 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी, ने 31 अक्टूबर 2022 को पौड़ी जिले के जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। लगभग ढाई वर्षों तक उन्होंने पौड़ी जिले में प्रशासनिक नेतृत्व प्रदान किया और अपने कार्यकाल के दौरान जिले के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजस्थान के उदयपुर के मूल निवासी डॉ. चौहान एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जो शिक्षा और सार्वजनिक सेवा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके माता-पिता द्वारा दिए गए नैतिक संस्कारों और मूल्यों ने उन्हें सामाजिक सरोकारों के प्रति संवेदनशील और समर्पित बनाया। राजस्थान में ही शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने राष्ट्रीय सेवा का सपना संजोया और सिविल सेवा परीक्षा में 181वीं रैंक हासिल कर उत्तराखंड कैडर में चयनित हुए। अपने अब तक के प्रशासनिक जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे 7 अक्टूबर 2017 से 31 जुलाई 2020 तक उत्तरकाशी के जिलाधिकारी और 4 अगस्त 2021 से 29 अक्टूबर 2022 तक पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी रहे। उनके नेतृत्व में इन पर्वतीय जिलों में आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचा विकास और प्रशासनिक सुचिता के अनेक सराहनीय कार्य हुए। पौड़ी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और पलायन रोकथाम जैसे जमीनी मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया। उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता, नवाचार और जन सहभागिता की स्पष्ट झलक देखने को मिली। हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में डॉ. आशीष चौहान को उत्तराखंड नागरिक उड्डयन और विकास प्राधिकरण (UCADA) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं खेल विभाग का निदेशक नियुक्त किया गया है। यह नई जिम्मेदारी उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को और विस्तार देने का अवसर है। डॉ. आशीष चौहान की यात्रा न केवल प्रशासनिक सफलता की कहानी है, बल्कि वह उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं जो सार्वजनिक सेवा के माध्यम से देश को बेहतर बनाने का सपना देखते हैं। उत्तराखंड के प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ. आशीष चौहान को अनूठे सम्मान से नवाजा गया है। स्पेन के पर्वतारोही जुआन एंटोनियो ने स्पेन की एक अनाम चोटी का नाम “Ashish Chauhan Peak” रख दिया है। यह सम्मान उन्हें 2018 में उत्तरकाशी यात्रा के दौरान मिली मदद और मार्गदर्शन के प्रतीकस्वरूप दिया गया।
दरअसल, जुआन एंटोनियो जब उत्तरकाशी में पर्वतारोहण के लिए आए थे, तो उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान से सहायता मांगी थी। डॉ. चौहान ने उन्हें न केवल हरसंभव प्रशासनिक मदद दी, बल्कि पहाड़ी इलाके की भौगोलिक जानकारी और संपर्क सहायता भी प्रदान की। इस सद्भाव और संवेदनशीलता से अभिभूत होकर एंटोनियो ने यह अनोखा सम्मान देने का निर्णय लिया। वर्तमान में डॉ. आशीष चौहान उत्तराखंड सरकार में अपर सचिव, नागरिक उड्डयन के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे पिथौरागढ़ और पौड़ी जैसे संवेदनशील जिलों में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्हें बेस्ट आईएएस अधिकारी के पुरस्कार के लिए चुना गया। पिथौरागढ़ में उनके द्वारा शुरू किया गया *सरकारी जैविक ब्रांड ‘रिलायंस’* पहाड़ी उत्पादों को बाज़ार दिलाने और महिलाओं के रोजगार में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली पहल रही, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी सराहा। करीब पौने तीन वर्षों तक पौड़ी जिले के जिलाधिकारी रहे डॉ. आशीष चौहान ने अपने कार्यकाल में जिले को विकास और सांस्कृतिक पहचान की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उन्होंने केवल योजनाएं नहीं चलाईं, बल्कि जनभावनाओं से गहरे जुड़ाव को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया।

उनकी पहल पर शुरू हुए:

●किसानों और काश्तकारों की आजीविका सुधार योजनाएं
●माउंटेन म्यूजियम और तारामंडल की स्थापना
●बेडू प्रसंस्करण प्रोजेक्ट (स्थानीय फल को बाजार से जोड़ने की कोशिश)
●गंगा पैदल पथ यात्रा / चारधाम पैदल यात्रा का पुनर्जीवन
●हेरिटेज भवन, गंगा संस्कृति केंद्र और त्रिशूल पार्क जैसे सांस्कृतिक उपक्रम
●नयार उत्सव, द बीटल एंड द गंगा फेस्टिवल, बर्ड फेस्टिवल आदि

विदाई के क्षणों में लिखा गया उनका गढ़वाली भाषा में संदेश आज लोगों के मन को छू रहा है। उस सरल पर आत्मीय भाषा में उन्होंने लिखा:

“” मेरा पौड़ी का भै-बैंणौ, नमस्कार!
मिल जतगा बि टैम यख बिताई, उ मिखणि सदानी समलौंण छीं। मेरु ट्रांसफर ह्वे गे। मि त चल ग्यों, पर तुम्हरु प्यार, तुम्हरु लाड़ सदानी म्ये दगड़ि रौलु, बस इतगा आसा चा🙏🏻”
यानी, “जो समय हमने साथ बिताया, वह मैं सदा सहेज कर रखूंगा। मेरा तबादला हो गया है, मैं चला गया, पर तुम्हारा प्यार और अपनापन सदा मेरे साथ रहेगा।”
उन्होंने यह संदेश अंग्रेज़ी में भी इसी भावना से लिखा:
“Goodbye Pauri… You were not just a district for me. You were home. A place where I learned, served, and belonged. I carry your love with me.”

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *