October 25, 2026
जीबीपीआईईटी में तीन दिवसीय रामलीला का भव्य आयोजन, भक्ति और भारतीय संस्कृति के आदर्शों का संदेश

जीबीपीआईईटी में तीन दिवसीय रामलीला का भव्य आयोजन, भक्ति और भारतीय संस्कृति के आदर्शों का संदेश

गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग कॉलेज (जीबीपीआईईटी), पौड़ी गढ़वाल में छात्र गतिविधि प्रकोष्ठ (SAC) एवं राम क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय रामलीला 2026 का समापन भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास के साथ हुआ। 22 से 24 अक्टूबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने रामायण के प्रमुख प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को भारतीय संस्कृति, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के आदर्शों से परिचित कराया. रामलीला के प्रथम दिन 22 अक्टूबर को गणेश वंदना एवं स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान दशरथ दरबार, सीता स्वयंवर, धनुष यज्ञ, कैकेयी-मंथरा प्रसंग, राम वनगमन तथा केवट संवाद सहित रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। दूसरे दिन 23 अक्टूबर को राम वनवास, भरत मिलाप, सीता हरण, जटायु प्रसंग, हनुमान-श्रीराम मिलन तथा अशोक वाटिका जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए गए। तीसरे दिन 24 अक्टूबर को काली माता की पूजा के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। इसके बाद मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध तथा रावण दहन के माध्यम से असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया गया। तीनों दिनों के मंचन में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट अभिनय, सजीव संवाद और आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। रामलीला के माध्यम से भक्ति, मर्यादा, त्याग, साहस, सत्य और सदाचार जैसे जीवन-मूल्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। रावण दहन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसने बुराई पर अच्छाई की विजय के शाश्वत संदेश को सुदृढ़ किया। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) वी. के. बंगा ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की सहभागिता और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रयासों की प्रशंसा की। रामलीला 2026 ने संस्थान के शैक्षणिक वातावरण में सांस्कृतिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और रामायण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया।

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