May 3, 2026
गढ़वाल विवि के पौड़ी परिसर में ‘योग एवं ध्यान के लाभ’ विषय पर हुई कार्यशाला

गढ़वाल विवि के पौड़ी परिसर में ‘योग एवं ध्यान के लाभ’ विषय पर हुई कार्यशाला

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ. बी.जी.आर. परिसर, पौड़ी के समाजशास्त्र विभाग एवं मानसिक स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में आज ‘योग एवं ध्यान के लाभ’ विषय पर एक प्रेरणादायक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ब्रह्मकुमारी से पधारे मुख्य वक्ता बी.के. सौरव ने छात्र-छात्राओं को योग, ध्यान एवं आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व से अवगत कराते हुए जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण और मानसिक संतुलन की अनिवार्यता पर विशेष बल दिया। उन्होंने अपने प्रेरक एवं जीवन्त अनुभवों के माध्यम से विभिन्न ध्यान तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया, जिससे प्रतिभागियों ने गहन रुचि एवं उत्साह के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी परिसर निदेशक प्रो. अनूप पांडे ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग एवं ध्यान न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि मानसिक शांति, एकाग्रता तथा आत्मविकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने इसे जीवन के उच्च लक्ष्यों की प्राप्ति का सशक्त माध्यम बताया। समाजशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. किरन बाला ने वर्तमान समय में बढ़ते “डिजिटल प्रदूषण” पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया पर निरंतर स्क्रोलिंग तथा सूचना के अत्यधिक दबाव के कारण युवा वर्ग तनाव, चिंता एवं अवसाद जैसी मानसिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में योग एवं ध्यान मानसिक संतुलन एवं आंतरिक शांति बनाए रखने के प्रभावी साधन सिद्ध हो सकते हैं। इस अवसर पर एनईपी सारथी अमन नयाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए इस तरह के कार्यक्रमों की नितांत आवश्यकता है। एनईपी में इस विषय पाठ्यक्रम में प्रमुखता से रखा गया है। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. ल्हामु , सहायक प्राध्यापक, समाजशस्त्र विभाग, द्वारा किया गया। इस अवसर पर बी.के. सुमन, बी.के. लक्ष्मी, डॉ. धारणा, डॉ. सपना रावत, डॉ. अतुल सैनी, डॉ. अनिल दत्त, डॉ. बिंदु यादव, डॉ. धर्मेंद्र सहित अनेक शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए योग एवं ध्यान की विधियों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प व्यक्त किया।

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