नर्सिंग भर्ती समेत विभिन्न मांगों को लेकर नर्सिंग एकता मंच का आंदोलन लगातार तीव्र होता जा रहा है। अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसमें प्रदेश के सभी जिलों से भारी संख्या में बेरोजगार नर्सिंग अधिकारी और अभ्यर्थी शामिल हुए। धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों का जोश और नाराजगी साफ नजर आई। धरना दे रहे नर्सिंग अधिकारियों ने आज सरकार को अपने दर्द और रोष को दर्शाते हुए खून से लिखा पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने अपनी सभी प्रमुख मांगें दर्ज करते हुए सरकार को साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे सोमवार को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे। नर्सिंग समुदाय की प्रमुख माँगें है कि नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया की जारी विज्ञप्ति को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा संबंधित भर्ती पोर्टल को बंद किया जाए। भर्ती प्रक्रिया को पूर्व की तरह Year-wise संचालित किया जाए, ताकि वरिष्ठता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। IPHS मानकों के अनुसार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 2500+ पदों पर एक साथ नई विज्ञप्ति जारी की जाए। उत्तराखंड के मूल निवासी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिले तथा अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को वर्तमान भर्ती से अलग रखा जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार अवसर मिल सकें। आयु सीमा पार कर चुके योग्य अभ्यर्थियों को विशेष आयु-छूट प्रदान की जाए, ताकि वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकें। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नर्सिंग समुदाय राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है और कोविड काल में भी नर्सों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सेवा दी, लेकिन अब सरकार बेरोजगार नर्सिंग अधिकारियों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “यदि सरकार हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है तो सोमवार को हम हजारों की संख्या में मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे और आंदोलन को और कठोर रूप देंगे। इस दौरान धरना स्थल पर प्रमुख रूप से अध्यक्ष नवल पुण्डीर, संरक्षक विकास पुण्डीर, उपाध्यक्ष सरिता जोशी, सचिव राजेन्द्र कुकरेती, सह सचिव अनिल रमोला, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रवेश रावत, तथा कार्यकारिणी के सदस्य स्तुति सती, पपेंद्र, आकाश, अजीत भंडारी, मधु उनियाल, श्वेता डोभाल आदि मौजूद रहे। धरना स्थल पर नर्सिंग अधिकारियों की बढ़ती संख्या और रोष को देखते हुए आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत स्पष्ट हैं।

